का इंदिरा का लखन
ऊ से लिखा ही एक दूसरा ख़त भी कांग्रेस में संघी
मानसिकता से सावधान करता है. वे लिखती हैं, "सुनती हूँ कि टंडनजी हर वैसे
शहर का नाम बदल देना चाहते हैं जिसके आख़िर में 'बाद' लगा है और उसकी जगह
वे 'नगर' कर देना चाहते हैं. अगर इस किस्म की चीज़ें और होती रहीं तो लगता
है मैं खुद को "ज़ोहरा बेगम' या ऐसा ही कुछ और कहलाना शुरू कर दूँगी."
बाद
में खुद इंदिरा गाँधी में यह दृढ़ता कम होने लगी और वे हिंदू प्रतीकों से
काम लेने लगीं. इसीलिए नेहरू और शुरुआती इंदिरा के बाद राहुल पहले नेता हैं
जो संघ को भारत के लिए ख़तरनाक बताना अपनी राजनीति को स्पष्ट करने के लिए
ज़रूरी मानते हैं.
राहुल ऐसा करके यह भी बता रहे हैं कि कांग्रेस
सिर्फ़ सत्ता की नहीं, विचारों की लड़ाई लड़ रही है. ध्यान रहे वे भारतीय
जनता पार्टी के बजाए हर जगह पहले संघ पर हमला कर रहे हैं. ऐसा करके वो यह
भी साबित करना चाहते हैं कि दरअसल संघ एक राजनीतिक संगठन है. खुद को इस
स्तर पर देखना संघ को पसंद नहीं क्योंकि वह खुद को राजनीति के ऊपर रखकर
देखना चाहता है
. वह एक तरह से खुद को कई राजनीतिक दलों में रक्त की तरह
प्रवाहित मानता है.
राहुल गांधी ने यह कहा कि संघ भारत के हर संस्थान
पर कब्ज़ा करना चाहता है. यह बात महत्त्वपूर्ण है क्योंकि अगर भारतीय
राष्ट्र राज्य प्रत्येक सांस्थानिक तंत्र पर एक विचार का कब्जा हो जाएगा तो
जनतंत्र की संभावना ही जाती रहेगी. इस पर ठहर कर किसी ने विचार नहीं किया
है कि ऐसा होने के निहितार्थ समाज के लिए क्या हैं!
यह सिर्फ संघ और ब्रदरहुड नहीं बल्कि कम्युनिस्ट पार्टियों का भी तरीका
है जिसमें वे दूसरे विचारों के लिए कोई जगह नहीं छोड़ना चाहतीं.
संस्थाओं
की स्वतंत्रता क्यों जनतंत्र और स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है, इस पर हमने
सोचा नहीं इसलिए यह स्वाभाविक मानते हैं कि विश्वविद्यालयों के कुलपति या
दूसरे निकायों के प्रमुख सत्ताधारी दल की विचारधारा के समर्थक हों, तो कोई
हर्ज नहीं. राहुल एक नज़रअंदाज किए गए पक्ष पर रोशनी डालने की कोशिश कर रहे
हैं.
कुछ वर्ष पहले जब राहुल गाँधी से पूछा गया था कि संघ की तरह ही
अपने विचार के प्रचार के लिए कांग्रेस शिक्षा संस्थान क्यों नहीं चलाती तो
उनका जवाब था कि स्कूल विचार के प्रचार का माध्यम नहीं होने चाहिए इसलिए
स्कूल चलाना पार्टियों का काम नहीं हो सकता, यह शिक्षाविदों का काम है.
राहुल
बार-बार इस भारत के मूल विचार के लिए संघर्ष बता रहे हैं. यह एक तरह से
आज़ादी के बाद कांग्रेस के लिए पहला मौका है कि वह किसी विचार से खुद को
जोड़ने की कोशिश कर रही है. विचार संघ के लिए, वामपंथियों के लिए तो
स्वाभाविक है लेकिन कांग्रेस के लिए वह बिलकुल नई चीज़ है. खुद उन्हें भारत
के उस विचार को खोजना होगा जिसकी विरासत का दावा राहुल कर रहे हैं.
संघ को चिढ़ानेवाली दूसरी बात है बार बार यह कहना कि ब्रदरहुड की तरह
संघ में स्त्रियों का प्रवेश नहीं है. संघ इस पर कोई चर्चा नहीं चाहता
लेकिन राहुल हर बार उस पर आक्रमण करते हुए यह कहना ज़रूरी समझते हैं, इस
तरह वे बहुसंख्यकवादी विचारधारा के पितृसत्तावादी चरित्र को हमेशा सामने
रखना चाहते हैं.
राहुल ने यूरोप के अपने दौरे में यह दुहराया कि
पिछले चार सालों
में उन्होंने महसूस किया कि भारत के सांस्थानिक चरित्र को
आमूलचूल बदल देने की कोशिश की जा रही है और इससे वे अपने कर्तव्य के प्रति
सचेत हुए. यह कर्तव्य भारत में समावेशिता की क्षमता बढ़ाने का है. ऐसा कहके
राहुल खुद अपने मिशन को राजनीतिक मात्र तक सीमित रखने की जगह एक साभ्यतिक
विचार का अभियान बता रहे हैं.
यह जितनी संघ को चुनौती है, उतनी ही
कांग्रेस को भी. क्या वह फिर से अपने अस्तित्व के तर्क की खोज करगी? क्या
वह दोबारा भारत की खोज करेगी? रॉबर्ट वाड्रा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है.
इस एफ़आईआर में रियलिटी कंपनी डीएलएफ़ गुरुग्राम और ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज का नाम भी शामिल है.
मानेसर के पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार ने पीटीआई को बताया कि यह एफ़आईआर खेड़कीदौला पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई गई है.
इस मुद्दे पर रॉबर्ट वाड्रा ने भी कहा कि चुनाव
आ रहे हैं इसलिए उनके पुराने मामलों को फिर से सामने लाया जा रहा है.
यह
मामला सुरेंद्र शर्मा नाम के शख्स ने दर्ज करवाया है. पुलिस को दी शिकायत
में सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि 2007 में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी कंपनी ने
शिकोहपुर गांव में ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज के जरिए साढ़े तीन एकड़ जमीन
औने-पौने रेट में ख़रीदी.
रॉबर्ट वाड्रा इस कंपनी में डायरेक्टर हैं. आरोप है कि उस दौरान हरियाणा
के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने नियमों को ताक पर रखते हुए इस ज़मीन को
कर्मशल बना दिया.
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रॉबर्ट वाड्रा ने
कहा, "चुनाव का मौसम है, तेल कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है....इसलिए असली
मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाकर मेरे एक दशक पुराने मामले को सामने लाया
जा रहा है. इसमें नया क्या है?"सुप्रीम कोर्ट में दूसरे सबसे वरिष्ठ जज
जस्टिस रंजन गोगोई, 3 अक्तूबर को भारत के मुख्य न्यायाधीश का पदभार ग्रहण करेंगे.
जजों
की वरिष्ठता की परंपरा को कायम रखते हुए मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा
ने जस्टिस गोगोई के नाम की सिफ़ारिश की है. जस्टिस गोगोई अगले साल 17 नवंबर
तक मुख्य न्यायाधीश रहेंगे.
कुछ दिन पहले ही क़ानून मंत्रालय ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा से अपने उत्तराधिकारी के नाम की अनुशंसा करने को कहा था.
जस्टिस
रंजन गोगोई उन चार जजों में शामिल थे जिन्होंने इसी साल जनवरी में मुख्य
न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहते हुए
आलोचना की थी कि वह मामलों के आवंटन में सुप्रीम कोर्ट के मास्टर ऑफ़ द
रोस्टर होने के अपने अधिकार का दुरुपयोग कर रहे हैं.श के सबसे बड़े कर्जदाता बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने विभिन्न परिपक्वता
अवधि वाले
कर्ज की दरों में 0.2 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है. नई दरें
शनिवार से प्रभावी होंगी.
निजी क्षेत्र के बैंकों आईसीआईसी बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक ने भी होम लोन दरें ब
ढ़ा दी हैं.